Saturday, March 19, 2011

Harivanshrai Bacchan's poem हिम्मत करनेवालों की कभी हार नहीं होती




लेहेरों से डरकर नौका पार नहीं होती
हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नन्ही चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।

डुबकियां सिंधू में गोताखोर लगाता है
जा जाकर खाली हाथ लौट आता है।
मिलते न सहज ही मोती पानी में
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
हिम्मत करनेवालों की हार नहीं होती।

असफलता एक चुनौती है स्वीकार करो
क्या कमी रह गयी देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो नींद चैन की त्यागो तुम
संघर्षोंका मैदान छोड़ मत भागो तुम।
कुछ कियेबिना ही जय जयकार नहीं होती
हिम्मत करनेवालों की कभी हार नहीं होती।

- बच्चन

One of the most powerful poems by Shri HarivanshRai Bacchan

Sunday, February 6, 2011

Malegalalli Madumagalu

ಇಲ್ಲಿ

ಯಾರೂ ಮುಖ್ಯರಲ್ಲ;
ಯಾರೂ ಅಮುಖ್ಯರಲ್ಲ;
ಯಾವದೂ ಯಃಕಶ್ಚಿತವಲ್ಲ!

ಇಲ್ಲಿ

ಯಾವುದಕ್ಕೂ ಮೊದಲಿಲ್ಲ;
ಯಾವುದಕ್ಕೂ ತುದಿಯಿಲ್ಲ;
ಯಾವುದೂ ಎಲ್ಲಿಯೂ ನಿಲ್ಲುವುದೂ ಇಲ್ಲ;
ಕೊನೆಮುಟ್ಟುವುದೂ ಇಲ್ಲ!

ಇಲ್ಲಿ

ಅವಸರವೂ ಸಾವಧಾನದ ಬೆನ್ನೀರಿದೆ!

ಇಲ್ಲಿ

ಎಲ್ಲಕ್ಕೂ ಇದೆ ಅರ್ಥ;
ಯಾವುದೂ ಅಲ್ಲ ವ್ಯರ್ಥ;
ನೀರೆಲ್ಲವೂ ತೀರ್ಥ!


Found these wonderful lines in the opening pages of Ku Vem Pu's classic novel ಮಲೆಗಳಲ್ಲಿ ಮದುಮಗಳು! Happy reading so far-Regional Literature can speak of certain subtle things that non-regional languages naturally miss out!